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उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़

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RSS महत्‍वपूर्ण सूचनायें
  • आदेश क्रमांक 1595/गोपनीय/2024 बिलासपुर, दिनांक 02 मार्च 2024।
  • छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर दिनांक 04.03.2024 से प्रभावी रोस्टर ।
  • अधिसूचना क्रमांक. 3771/चेकर बिलासपुर, दिनांक 29 फ़रवरी 2024।
  • अधिसूचना क्रमांक. 3769/चेकर बिलासपुर, दिनांक 29 फ़रवरी 2024।
  • नियम 5(1)(क ) के तहत पदोन्नति द्वारा जिला न्यायाधीश (प्रवेश स्तर) 2022 के पद के लिए साक्षात्कार हेतु कॉल लेटर।
  • अधिसूचना क्रमांक. 3534/चेकर बिलासपुर, दिनांक 26 फ़रवरी 2024।
  • आदेश क्रमांक 115/गोपनीय/2024 बिलासपुर, दिनांक 23 फरवरी 2024।
  • आदेश क्रमांक 38 बिलासपुर, दिनांक 23 फरवरी 2024।
  • 22 फरवरी, 2024 को अपराह्न 03:45 बजे माननीय मुख्य न्यायाधिपति की अदालत में फुल कोर्ट रेफरेंस होगा।
  • सूचना क्रमांक 3278/सीपीसी/2024 बिलासपुर, दिनांक 22 फरवरी 2024। (ब्लूजींस वी.सी. सॉफ्टवेयर के स्थान पर ज़ूम वी.सी. सॉफ्टवेयर के उपयोग के संबंध में)
  • पृष्ठांकन क्रमांक 3078/ 2024 बिलासपुर, दिनांक 19 फ़रवरी 2024।
  • अधिसूचना क्रमांक. 3077/आर. (जे.)/2024 दिनांक 19 फ़रवरी 2024।
  • पृष्ठांकन क्रमांक 99/गोपनीय/2024 बिलासपुर, दिनांक 16 फ़रवरी 2024।
  • इस रजिस्ट्री के मंत्रालयिक अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त अनंतिम ग्रेडेशन लिस्ट 2024|
नवीनतम ए.एफ.आर.   RSS
  • दाण्डिक विचारण सबूत और संशय- संशय स्वयं सबूत का स्थान नहीं ले सकता है - टेलीफोन कॉल केवल संशय पैदा करते हैं, किन्तु अन्य संपोषक साक्ष्य की अनुपस्थिति में वे सबूत का स्थान नहीं ले सकते हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख के दस्तावेजी साक्ष्य को, साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 65-क की दृष्टि में, केवल साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 65-ख के प्रावधानों के अनुसार ही साबित किया जा सकता है।
  • दं. प्र. सं. की धारा 313 के कथन में गलत स्पष्टीकरण या स्पष्टीकरण की अनुपस्थिति को परिस्थितियों की कड़ी को पूर्ण करने हेतु उपयोग में नहीं लिया जा सकता है, किन्तु गलत स्पष्टीकरण या स्पष्टीकरण की अनुपस्थिति का उपयोग आरोपी को दोषी साबित करने हेतु अतिरिक्त परिस्थितियों के रूप में किया जा सकता है।
  • भले ही शिकायतकर्ता पक्षद्रोही हो जाये, रिकार्ड पर उपलब्ध अन्य प्रासंगिक सामग्रियों के आधार पर दोषसिद्धि की जा सकती है।
  • वादी जो कपट या अन्य अनुचित आचरण का आरोप लगाता है, उसे इन आरोपों का स्पष्ट तथा विनिर्दिष्ट विवरण अभिलेख पर प्रस्तुत करना होगा।
  • पंजीकृत मुख्तारनामा प्रथम दृष्टया विधिमान्य है। सबूत का भार उस व्यक्ति पर होगा जो ऐसी उपधारणा को खण्डित करने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करता है।
  • जब आर.डी.ए. जैसी संस्था आम जनता को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए वचन देता है, तब वचनग्रहीता की मांग पर आर.डी.ए. के विरूद्ध वचन प्रवर्तनीय होगा।
  • आर.डी.ए. वचन विबंध के सिद्धांत से उनमुक्ति का दावा नही कर सकता तथा यह उसका दायित्व था कि वह उन रीतियों से कार्य करे जो उचित और न्यायसंगत हो।
  • केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1994 की धारा 11 ए (4) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए विस्तारित सीमा अवधि सामान्य नियम का अपवाद है और इसे साधारणतया हर परिस्थिति में लागू नहीं किया जा सकता है।
  • यदि चेक को उसकी वैधता के भीतर कई बार बैंक में प्रस्तुत किया जाता है, तो वाद हेतुक तब उत्पन्न होगा जब चेक अंतिम बार अनादरित हो जाए।
  • परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 में विहित दंड का उद्देश्य ऋण का भुगतान सुनिश्चित करना है।
  • यदि मृत्यु अभियुक्त द्वारा पूर्वचिन्तन के बिना अचानक हुई लडाई में कारित हुई है तथा अभियुक्त ने क्रूरता पूर्वक कृत्य कर लाभ उठाने का प्रयत्न नही किया है, तो ऐसा प्रकरण भा.द.वि. की धारा 300 के अपवाद 4 के अन्तर्गत आएगा।
  • अव्यस्क बच्चे की संरक्षकता का दावा पिता के अभिवचनों के आधार पर नहीं हो सकता, जो केवल समाज में पुरूषों द्वारा स्त्री जाति के विरूद्ध चले आ रहे द्वेष, जैसे कि विशेषतः पुरूष द्वारा स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने के वर्चस्व की लड़ाई के विचारधारा वाले सिद्वांत पर आधारित हो।
  • जब प्रकरण पूर्णतः परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित हो, तो साक्ष्य की श्रंखला को, सभी अधिसंभाव्याताओं में, आरोपी के अपराध की ओर इंगित करना आवश्यक है।