National emblem
  • Eng
स्कीन रीडर एक्सेस

उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़

नवीनतम समाचार सहायक ग्रेड-III, के पद हेतु आवेदित अभ्यर्थी अपना आवेदन पत्र क्रमांक प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें

×

RSS (Important Notice)

https://highcourt.cg.gov.in/cghighcourt.nic.in.xml

×

RSS (AFR)

https://highcourt.cg.gov.in/cghighcourt1.nic.in.xml

RSS महत्‍वपूर्ण सूचनायें
  • पृष्ठांकन क्रमांक 10956/चेकर बिलासपुर, दिनांक 12 जुलाई 2024।
  • आदेश क्रमांक 111(Misc.) बिलासपुर, दिनांक 11 जुलाई 2024।
  • पृष्ठांकन क्रमांक 10854/नियम/2024 बिलासपुर, दिनांक 11 जुलाई 2024।
  • पृष्ठांकन क्रमांक 10666/नियम/2024 बिलासपुर, दिनांक 09 जुलाई 2024।
  • छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर दिनांक 10.07.2024 से प्रभावी रोस्टर ।
  • आदेश क्रमांक 632/गोपनीय/2024 बिलासपुर, दिनांक 06 जुलाई 2024।
  • आदेश क्रमांक 630/गोपनीय/2024 बिलासपुर, दिनांक 05 जुलाई 2024।
  • आदेश क्रमांक 626/गोपनीय/2024 बिलासपुर, दिनांक 04 जुलाई 2024।
  • आदेश क्रमांक 624/गोपनीय/2024 बिलासपुर, दिनांक 03 जुलाई 2024।
  • पृष्ठांकन क्रमांक 623/बिलासपुर, दिनांक 02 जुलाई 2024।
  • आदेश क्रमांक 10068/ बिलासपुर, दिनांक 01 जुलाई 2024।
  • सहायक ग्रेड -III के पद पर भर्ती के संबंध में सूचना।
  • पृष्ठांकन क्रमांक 618/बिलासपुर, दिनांक 29 जून 2024।
  • अधिसूचना क्रमांक 9938/चेकर बिलासपुर, दिनांक 28 जून 2024 ।
  • पृष्ठांकन क्रमांक 617/गोपनीय/2024 बिलासपुर, दिनांक 28 जून 2024 ।
  • पृष्ठांकन क्रमांक 9793/बिलासपुर, दिनांक 26 जून 2024।
नवीनतम ए.एफ.आर.   RSS
  • भूमि की पहचान अभिनिश्चित करने में, भूमि के मूल नक्शें को अभिलेख में होना चाहिये, उक्त के अभाव में विलेख में उल्लेखित सीमाएँ पहचान तय करेंगी।
  • अर्ध आपराधिक कार्यवाहियों में आमतौर पर दंड तब तक अधिरोपित नहीं किया जाएगा जब तक कि दायित्वाधीन पक्षकार ने जानबूझकर विधि की अवज्ञा नहीं की हो या दूषित आचरण का दोषी रहा हो या दायित्व की अवहेलना में कार्य किया हो।
  • ऐसे निष्कर्ष को उचित ठहराने के लिए यदि कोई साक्ष्य उपलब्ध न हो तो, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत प्रदत्त अधिकारिता का प्रयोग किया जा सकता है।
  • मध्यस्थ द्वारा किये गये निर्वचन को सामान्यतः न्यायालय अपने निर्वचन से प्रतिस्थापित नहीं सकता किन्तु जब माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम 1996 की धारा 34 के अंतर्गत अवार्ड का न्यायिक पुनर्विलोकन चाहा गया हो तो न्यायालय को यह चाहिये कि वह निष्पक्ष परीक्षण कर आधार का सकारण उल्लेख अपने आदेश में करें।
  • आईपीसी की धारा 364 ए के तहत तब तक कोई दोषसिद्धि नहीं की जा सकती जब तक अभियोजन पक्ष यह साबित न कर दे कि अपहरण के साथ फिरौती की मांग और जान की धमकी भी शामिल थी।
  • POCSO अधिनियम, 2012 के तहत विशेष अपराधों में केवल पागलपन के आधार पर आरोपी को छूट नहीं दी जा सकती है। उचित संदेह से परे अपवादों को साबित करने का सिद्धांत कायम रहना चाहिए।
  • आयकर अधिनियम 1961 की धारा 68 के तहत, ऋणदाताओं के पहचान का प्रमाण, ऋणदाताओं की अग्रिम धनराशि देने की क्षमता और संव्यवहार की वास्तविकता, स्थापित करने का प्रारंभिक दायित्व निर्धारिती पर है।
  • प्राधिकारी जिसे कानून के तहत शक्ति प्रदान की गई है, मात्र वही आदेश पारित कर सकता है, कोई अन्य व्यक्ति, यहां तक कि उच्चतर प्राधिकारी भी, वैधानिक प्राधिकारियों के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।
  • नगर पालिका अधिनियम की धारा 94 के तहत परिषद को उक्त अधिनियम की धारा 95 के तहत राज्य शासन द्वारा विरचित नियमों के अन्तर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियुक्त करने की शक्ति है।
  • मौखिक साक्ष्य यह साबित करने हेतु प्रस्तुत किया जा सकता है कि विलेख में वर्णित कथन नाममात्र के लिए थे या उनके निष्पादन का आशय नहीं था।
  • उच्चतम न्यायालय की ऐसी दो पीठे जिसमें एक समान सदस्य है के द्वारा दिए गए निर्णयों के बीच मतभेद होने की स्थिति में, पूर्व पीठ द्वारा दिया गया निर्णय बंधनकारी होगा जब तक कि बाद वाली पीठ जिसमे उतने ही सदस्य संख्या है के द्वारा इस सम्बन्ध में स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है और इस प्रकार स्पष्टीकरण दिए जाने पर बाद वाला निर्णय बंधनकारी होगा।
  • उपधारणा - धारा 27 साधारण खण्ड अधिनियम यह उपधारित करती है कि सूचना तामील हुई तब समझी जायेगी जब इसे सही पते पर पंजीकृत डाक द्वारा भेज दी गई हो।
  • परिसीमा - जब माध्यस्थम् और सुलह अधिनियम, 1996 में विनिर्दिष्ट परिसीमा अवधि निर्धारित हो तो पंचाट को चुनौती देने के लिये न्यायालय द्वारा अतिरिक्त समय प्रदान नहीं किया जा सकता।
  • थ्वलम्ब - केवल इसलिए कि शासन सम्मिलित है, विलम्ब की माफी के लिए कोई अलग मानदंड निर्धारित नहीं किया जा सकता।